दुबई की ऊँचाईयों के बीच, एक पल था जो सबकी निगाहों में ठहर गया।
बुर्ज खलीफा के नीचे कुछ भारतीय मुसाफिरों ने 'छोगाड़ा तारा' की धुन पर गरबा शुरू कर दिया —
ना स्टेज था, ना इजाज़त... बस दिल था और ताल।
15 जून 2025 को जब ये वीडियो हवा की तरह फैला,
तो कुछ चेहरों पर मुस्कान आई... और कुछ ने सिर खुजाया —
ये आज़ादी थी या दायरे के बाहर कदम?
यह वीडियो देखकर लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं – एक पक्ष इसे भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रचार मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे एक अनुचित और गैर-जिम्मेदार हरकत मानता है।
🇮🇳 भारतीय संस्कृति का उत्सव या विदेश में अनुशासनहीनता?
गरबा केवल नृत्य नहीं है, यह एक परंपरा है जो नवरात्रि के दौरान भारत में विशेष रूप से गुजरात राज्य में मनाई जाती है। इसकी ऊर्जा, रंग, और सामाजिक जुड़ाव की भावना पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसलिए जब कुछ भारतीय पर्यटक गरबा करते हैं, तो वे सिर्फ नाच नहीं रहे होते, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर को सजीव कर रहे होते हैं।
पर सवाल यह है — क्या हर जगह इसे बिना अनुमति प्रस्तुत करना सही है?
📍 बुर्ज खलीफा: सिर्फ एक टूरिस्ट प्लेस नहीं, एक वैश्विक प्रतीक
बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है, और इसका ऑब्ज़र्वेशन डेक एक शांत और नियंत्रित स्थान माना जाता है। वहां अधिकतर पर्यटक केवल नज़ारे देखते हैं, फोटो लेते हैं और शांति से समय बिताते हैं। किसी भी प्रकार का शोर-शराबा, नाचना या ग्रुप परफॉर्मेंस वहां के नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
हालांकि वीडियो में किसी ने कोई नुकसान नहीं किया, लेकिन इसने एक अहम सवाल खड़ा किया है — क्या हम विदेश में भी अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं?
🌐 सोशल मीडिया का असर: तारीफ या आलोचना?
इस वीडियो को इंस्टाग्राम और ट्विटर पर लाखों व्यूज़ और शेयर मिले। कई भारतीयों ने इसे गर्व का क्षण बताया। “वाह! भारत की संस्कृति अब बुर्ज खलीफा पर पहुंच गई!” जैसी टिप्पणियां आईं।
वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने कहा — “क्या ऐसा करना नियमों का उल्लंघन नहीं है?”, “अगर हर कोई ऐसा करे तो क्या होगा?”, “इंडियन टूरिस्ट की छवि क्यों बार-बार ऐसी हरकतों से खराब होती है?”
कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने सवाल उठाया कि अगर किसी दूसरे देश के लोग भारत के मंदिरों में ऐसे डांस करें तो क्या हम उसे स्वीकार करेंगे?
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⚖️ जिम्मेदारी बनाम भावना
इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि संस्कृति का प्रदर्शन और जिम्मेदारी साथ-साथ कैसे चले?
हां, हमें गर्व है अपनी संस्कृति पर।
लेकिन, हमें उतनी ही जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए कि हम दूसरों के नियमों और स्थान की गरिमा का भी सम्मान करें।
संस्कृति को दिखाना गलत नहीं है, लेकिन बिना अनुमति, नियम तोड़कर उसे प्रस्तुत करना शायद सही तरीका नहीं है।
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🚧 भविष्य में क्या होना चाहिए?
इस तरह की घटनाएं भविष्य के लिए एक सीख हो सकती हैं। ट्रैवल एजेंसियों को टूरिस्ट को पहले से ऐसे स्थानों के नियम समझाने चाहिए। साथ ही अगर कोई सांस्कृतिक प्रस्तुति करनी हो, तो स्थानीय अनुमति लेकर इसे कानूनी और सभ्य तरीके से किया जा सकता है।
संभव है कि दुबई प्रशासन अब इस तरह के मामलों पर सख्त रवैया अपनाए और पर्यटकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करे।
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🧭 निष्कर्ष
बुर्ज खलीफा पर गरबा डांस न तो किसी अपराध के इरादे से किया गया और न ही किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए, लेकिन यह घटना हमें यह जरूर सिखाती है कि भावनाओं में बहकर हम नियमों को नजरअंदाज न करें।
भारत की संस्कृति महान है — लेकिन विदेश में उसका सही तरीके से और जिम्मेदारी के साथ प्रदर्शन ही सही मायने में उसका सम्मान है।